हीरा सोई सराहिये
सहे घनन की चोट
कपट को रंगे मानवा
परखत निकरा खोट
हीरा तहाँ ना खोलिये
जहाँ कुंजड़ों की हाट
सहजे गाँठि बाँधी के
लगिये अपनी बात
हीरा सोई सराहिये...
हीरा परा बाजार में
रहा छार लपटाय
केतिहे मूरख पची मुए
कोई पारखी लिया उठाय
हीरा सोई सराहिये...
Movie/Album: हाईवे (2014)
Music By: ए.आर.रहमान
Lyrics By: संत कबीर
Performed By: श्वेता पंडित
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