Wednesday, 31 March 2021

तुम पास आ रहे हो

धीरे, धीरे, धीरे, धीरे
आँखों में छा रहे हो
तुम पास आ रहे हो
चुपके, चुपके, चुपके, चुपके
दिल में समा रहे हो
तुम पास आ रहे हो
धीरे, धीरे
चुपके, चुपके

झुकती हुई ये पलकें, खुलते हुए ये गेसू
ये शरम की अदाएँ, वो शोखियों का जादू
कैसे, कैसे, कैसे कैसे
सपने दिखा रहे हो
तुम पास आ रहे हो...

फूलों भरे नज़ारे, ये खुशबुओं के डेरे
लगते हैं ख्वाब जैसे, ये शाम ये सवेरे
हौले, हौले, हौले, हौले
अरमां जगा रहे हो
तुम पास आ रहे हो...

Movie/Album: वीर ज़ारा (2004)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह, लता मंगेशकर

Tuesday, 30 March 2021

कहीं-कहीं से हर चेहरा

कहीं-कहीं से हर चेहरा
तुम जैसा लगता है
तुमको भूल ना पाएँगे हम
ऐसा लगता है

ऐसा भी एक रंग है
जो करता है बातें भी
जो भी इसको पहन ले वो
अपना सा लगता है
तुमको भूल ना पाएँगे हम
ऐसा लगता है...

और तो सब कुछ ठीक है लेकिन
कभी-कभी यूँ ही चलता फिरता शहर
अचानक, अचानक तन्हाँ लगता है
तुमको भूल ना पाएँगे हम
ऐसा लगता है...

अब भी यूँ मिलते हैं
हमसे फ़ूल चमेली के
जैसे इनसे अपना कोई
रिश्ता लगता है
तुमको भूल ना पाएँगे हम
ऐसा लगता है...

Movie/Album: दिल कहीं होश कहीं (2006)
Music By: आदेश श्रीवास्तव
Lyrics By: निदा फ़ाज़ली
Performed By: जगजीत सिंह, लता मंगेशकर, आशा भोसले

Monday, 29 March 2021

मेरे जैसे बन जाओगे

मेरे जैसे बन जाओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
दीवारों से टकराओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
मेरे जैसे बन जाओगे...

हर बात गँवारा कर लोगे
मन्नत भी उतारा कर लोगे
ताबीज़ें भी बँधवाओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

तन्हाई के झूले झूलोगे
हर बात पुरानी भूलोगे
आइने से तुम घबराओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

जब सूरज भी खो जायेगा
और चाँद कहीं सो जायेगा
तुम भी घर देर से आओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा

बेचैनी जब बढ़ जायेगी
और याद किसी की आएगी
तुम मेरी गज़लें गाओगे
जब इश्क तुम्हें हो जायेगा
मेरे जैसे बन जाओगे...

Movie/Album: एक्सटेसीज़ (1984)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: सईद राही
Performed By: जगजीत सिंह, चित्रा सिंह

Sunday, 28 March 2021

मैं भूल जाऊँ तुम्हें

मैं भूल जाऊँ तुम्हें
अब यही मुनासिब है
मगर भुलाना भी चाहूँ
तो किस तरह भूलूँ
कि तुम तो फ़िर भी हकीकत हो
कोई ख्वाब नहीं

यहाँ तो दिल का ये आलम है क्या कहूँ, कमबख़्त
भुला सका ना ये वो सिलसिला, जो था भी नहीं
वो इक ख्याल जो आवाज़ तक गया ही नहीं
वो एक बात जो मैं कह नहीं सका तुमसे
वो एक रब्त जो हममें कभी रहा ही नहीं
मुझे है याद वो सब जो कभी हुआ ही नहीं
अगर ये हाल है दिल का तो कोई समझाए
तुम्हें भुलाना भी चाहूँ...

Movie/Album: सिलसिले (1998)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह

Saturday, 27 March 2021

जब सामने तुम

आइना देख के बोले ये सँवरने वाले
अब तो बे-मौत मरेंगे मेरे मरने वाले

देख के तुमको होश में आना भूल गये
याद रहे तुम और ज़माना भूल गये
जब सामने तुम आ जाते हो
क्या जानिए क्या हो जाता है
कुछ मिल जाता है, कुछ खो जाता है
क्या जानिए क्या हो जाता है

चाहा था ये कहेंगे, सोचा था वो कहेंगे
आए वो सामने तो, कुछ भी ना कह सके
बस देखा किये उन्हें हम

देखकर तुमको यकीं होता है
कोई इतना भी हसीं होता है
देख पाते हैं कहाँ हम तुमको
दिल कहीं होश कहीं होता है
जब सामने तुम...

आकर चले न जाना, ऐसे नहीं सताना
देकर हँसी लबों को, आँखों को मत रुलाना
देना ना बेकरारी दिल का करार बन के
यादों में खो ना जाना, तुम इंतज़ार बन के
इंतज़ार बन के

भूलकर तुमको न जी पाएँगे
साथ तुम होगी जहाँ जाएँगे
हम कोई वक़्त नहीं हैं हमदम
जब बुलाओगे चले आएँगे
जब सामने तुम...

Movie/Album: दिल कहीं होश कहीं (2006)
Music By: आदेश श्रीवास्तव
Lyrics By: निदा फ़ाज़ली
Performed By: जगजीत सिंह, आशा भोसले

Friday, 26 March 2021

दिल तरसता है

इक खलिश दिल की ये, क्या से क्या कर गयी
खुशियों की आँख में, बारिशें भर गयी
लोग अपनों से भी बेखबर हो गये
खुशबुएँ छूनी थी, शौक में खो गये
पा के जुगनू ज़रा रौशनी के लिए
दिल तरसता है अब ज़िन्दगी के लिए

सुर्ख़ फूलों के जो नर्म साये मिले
अपनों की शक्ल में जो पराए मिले
सुर्ख़ फूलों के जो नर्म साये मिले
अपनों की शक्ल में जो पराए मिले
इनके पीछे ज़रा सोच के भागिए
कच्चे रंगों की है तितलियाँ देखिये
एक पल ही मिला था खुशी के लिए
दिल तरसता है अब ज़िन्दगी के लिए

एक ख्वाहिश में थी सैंकड़ों आंधियाँ
पल में बिखरे सभी रिश्तों के आशियाँ
प्यासे लब का यही सबको हासिल मिला
जुस्तजू दरिया थी खुश्क साहिल मिला
खो के नींदें किसी अजनबी के लिए
दिल तरसता है अब ज़िन्दगी के लिए

Movie/Album: स्टॉप (2004)
Music By: विशाल-शेखर
Lyrics By: पंछी जालोनवी
Performed By: जगजीत सिंह

Thursday, 25 March 2021

आपके दिल ने हमें

आपके दिल ने हमें आवाज़ दी, हम आ गए
हमको ले आई मुहब्बत आपकी, हम आ गए
आपके दिल ने...

अपने आने का सबब हम क्या बतायें आपको
बैठे-बैठे याद आई आपकी, हम आ गए

हम हैं दिल वाले भला हम पर किसी का ज़ोर क्या
जायेंगे अपनी खुशी, अपनी खुशी हम आ गए
हमको ले आई मुहब्बत आपकी, हम आ गए
आपके दिल ने...

कहिये अब क्या है चरागों की ज़रूरत आपको
ले के आँखों में वफ़ा की रौशनी हम आ गए
हमको ले आई मुहब्बत आपकी, हम आ गए
आपके दिल ने...

Movie/Album: इंतेहा (2009)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: पय्याम सईदी
Performed By: जगजीत सिंह

Wednesday, 24 March 2021

हर एक घर में दीया

हर एक घर में दीया भी जले, अनाज भी हो
अगर ना हो कहीं ऐसा तो एहतजाज भी हो
हर एक घर में..

हुकूमतों को बदलना तो कुछ मुहाल नहीं
हुकूमतें जो बदलता है वो समाज भी हो
अगर ना हो कहीं ऐसा तो एहतजाज भी हो
हर एक घर में...

रहेगी कब तलक वादों में कैद खुशहाली
हर एक बार ही कल क्यों, कभी तो आज भी हो
अगर ना हो कहीं ऐसा तो एहतजाज भी हो
हर एक घर में...

ना करते शोर शराबा तो और क्या करते
तुम्हारे शहर में कुछ और काम-काज भी हो
अगर ना हो कहीं ऐसा तो एहतजाज भी हो
हर एक घर में...

Movie/Album: धूप (2003)
Music By: ललित सेन
Lyrics By: निदा फ़ाज़ली
Performed By: जगजीत सिंह

Tuesday, 23 March 2021

कभी तो आसमाँ से

कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए
तुम्हारे नाम की इक खूबसूरत शाम हो जाए
कभी तो आसमाँ से...

वो मेरा नाम सुन कर कुछ ज़रा शरमा से जाते हैं
बहुत मुमकिन है, कल इसका मुहब्बत नाम हो जाए

ज़रा सा मुस्कुरा कर हाल पूछो दिल बेहाल जाए
हमारा काम हो जाए, तुम्हारा नाम हो जाए
कभी तो आसमाँ से...

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाए
कभी तो आसमाँ से...

Movie/Album: तुम तो नहीं हो (2005)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: बशीर बद्र
Performed By: जगजीत सिंह

Monday, 22 March 2021

किसका चेहरा अब

चाँद भी देखा, फूल भी देखा
बादल, बिजली, तितली, जुगनू
कोई नहीं है ऐसा
तेरा हुस्न है जैसा

मेरी निगाह ने ये कैसा ख्वाब देखा है
ज़मीं पे चलता हुआ माहताब देखा है

मेरी आँखों ने चुना है तुझको दुनिया देखकर
किसका चेहरा अब मैं देखूँ
तेरा चेहरा देखकर
मेरी आँखों ने चुना...

नींद भी देखी, ख्वाब भी देखा
चूड़ी, बिंदिया, दरपन, खुशबू
कोई नहीं है ऐसा
तेरा प्यार है जैसा
मेरी आँखों ने चुना...

रंग भी देखा, रूप भी देखा
रस्ता, मंज़िल, साहिल, महफ़िल
कोई नहीं है ऐसा
तेरा साथ है जैसा
मेरी आँखों ने चुना...

बहुत खूबसूरत है आँखें तुम्हारी
बना दीजिए इनको किस्मत हमारी
उसे और क्या चाहिए ज़िंदगी में
जिसे मिल गई मुहब्बत तुम्हारी

Movie/Album: तरकीब (2000)
Music By: आदेश श्रीवास्तव
Lyrics By: निदा फ़ज़ली
Performed By: जगजीत सिंह, अल्का यागनिक

Sunday, 21 March 2021

खुश रहे या बहुत उदास रहे

खुश रहे या बहुत उदास रहे
ज़िन्दगी तेरे आस-पास रहे
खुश रहे या बहुत उदास...

आज हम सबके साथ खूब हँसे
और फ़िर देर तक उदास रहे
ज़िन्दगी तेरे आस-पास रहे
खुश रहे या बहुत उदास..

रात के रास्ते भी रौशन हो
हाथ में चाँद का गिलास रहे

आदमी के लिए ज़रूरी है
कोई उम्मीद कोई आस रहे
ज़िन्दगी तेरे आस-पास रहे
खुश रहे या बहुत उदास...

Movie/Album: तुम तो नहीं हो (2005)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: बशीर बद्र
Performed By: जगजीत सिंह

 

Saturday, 20 March 2021

झुकी-झुकी सी नज़र

झुकी-झुकी सी नज़र
बेकरार है के नहीं
दबा-दबा सा सही
दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...

तू अपने दिल की जवाँ धड़कनों को गिन के बता
मेरी तरह तेरा दिल बेकरार है के नहीं
दबा-दबा सा सही दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...

वो पल के जिसमें मोहब्बत जवान होती है
उस एक पल का तुझे इंतज़ार है के नहीं
दबा-दबा सा सही दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...

तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को
तुझे भी अपने पे ये ऐतबार है के नहीं
दबा-दबा सा सही दिल में प्यार है के नहीं
झुकी-झुकी सी नज़र...

Movie/Album: अर्थ (1982)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: कैफ़ी आज़मी
Performed by: जगजीत सिंह

Friday, 19 March 2021

प्यार का पहला ख़त

प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नए परिंदो को उड़ने में वक़्त तो लगता है
प्यार का पहला ख़त...

जिस्म की बात नहीं थी
उनके दिल तक जाना था
लम्बी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है
प्यार का पहला ख़त...

गाँठ अगर लग जाये तो
फ़िर रिश्ते हों या डोरी
लाख़ करें कोशिश खुलने में वक़्त तो लगता है
प्यार का पहला ख़त...

हमने इलाज-ए-जख़्में दिल तो
ढूँढ लिया लेकिन
गहरे जख्मों को भरने में वक़्त तो लगता है
प्यार का पहला ख़त...

Movie/Album: फेस टू फेस (1994)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: हस्ती
Performed By: जगजीत सिंह

Thursday, 18 March 2021

बात निकलेगी तो

बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी
लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे
ये भी पूछेंगे के तुम इतनी परेशां क्यूँ हो

उंगलियाँ उठेंगी सूखे हुए बालों की तरफ़
इक नज़र देखेंगे गुज़रे हुए सालों की तरफ़
चूड़ियों पर भी कई तंज़ किये जाएँगे
काँपते हाथों पे भी फ़िक्रें कसे जाएँगे

लोग ज़ालिम हैं हर इक बात का ताना देंगे
बातों-बातों में मेरा ज़िक्र भी ले आएँगे
बातों-बातों में मेरा ज़िक्र भी ले आएँगे
उनकी बातों का ज़रा सा भी असर मत लेना
वरना चेहरे के तासुर से समझ जाएँगे

चाहे कुछ भी हो सवालात ना करना उनसे
चाहे कुछ भी हो सवालात ना करना उनसे
मेरे बारे में कोई बात ना करना उनसे
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी

Movie/Album: दि अनफ़ॉर्गेटेबल्स (1977)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: कफ़ील आज़र
Performed By: जगजीत सिंह

Wednesday, 17 March 2021

शाम से आँख में

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आपकी कमी सी है
शाम से आँख में...

दफ़्न कर दो हमें के साँस मिले
नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है
आज फिर आपकी कमी सी है

वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
इसकी आदत भी आदमी सी है
आज फिर आपकी कमी सी है

कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी
एक तसलीम लाज़मी सी है
शाम से आँख में नमी...

Movie/Album: मरासिम (2000)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: जगजीत सिंह

Tuesday, 16 March 2021

ये तेरा घर ये मेरा घर

ये तेरा घर ये मेरा घर
किसी को देखना हो गर
तो पहले आ के माँग ले
मेरी नज़र तेरी नज़र
ये तेरा घर ये मेरा घर
ये घर बहुत हसीन है

ना बादलों की छाँव में, ना चांदनी के गाँव में
ना फूल जैसे रास्ते, बने हैं इसके वास्ते
मगर ये घर अजीब है, ज़मीन के करीब है
ये ईंट-पत्थरों का घर, हमारी हसरतों का घर
ये तेरा घर, ये मेरा घर...

जो चांदनी नहीं तो क्या, ये रौशनी है प्यार की
दिलों के फूल खिल गए, तो फ़िक्र क्या बहार की
हमारे घर ना आएगी, कभी खुशी उधार की
हमारी राहतों का घर, हमारी चाहतों का घर
ये तेरा घर, ये मेरा घर...

यहाँ महक वफ़ाओं की, मुहब्बतों का रंग है
ये घर तुम्हारा ख्वाब है, ये घर मेरी उमँग है
ना आरज़ू पे कैद है, ना हौसले पे ज़ंग है
हमारे हौसलों का घर, हमारी हिम्मतों का घर
ये तेरा घर, ये मेरा घर...

Movie/Album: साथ साथ (1982)
Music By: कुलदीप सिंह
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह, चित्रा सिंह

Monday, 15 March 2021

ये दौलत भी ले लो

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन
वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी

मुहल्ले की सबसे पुरानी निशानी
वो बुढ़िया जिसे बच्चे कहते थे नानी
वो नानी की बातों में परियों का डेरा
वो चेहरे की झुर्रियों में सदियों का पहरा
भुलाए नहीं भूल सकता है कोई
वो छोटी सी रातें, वो लंबी कहानी

कड़ी धूप में अपने घर से निकलना
वो चिड़िया, वो बुलबुल, वो तितली पकड़ना
वो गुड़िया की शादी पे लड़ना-झगड़ना
वो झूलों से गिरना, वो गिर के संभलना
वो पीतल के छल्लों के प्यारे से तोहफ़े
वो टूटी हुईं चूड़ियों की निशानी

कभी रेत के ऊँचे टीलों पे जाना
घरौंदे बनाना, बना के मिटाना
वो मासूम चाहत की तस्वीर अपनी
वो ख्वाबों-खिलौनों की ज़ागीर अपनी
ना दुनिया का ग़म था, ना रिश्तों के बन्धन
बड़ी खूबसूरत थी वो ज़िन्दगानी...

Movie/Album: आज (1985)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: सुदर्शन फाकिर
Performed By: जगजीत सिंह

Sunday, 14 March 2021

कभी यूँ भी तो हो

कभी यूँ भी तो हो
दरिया का साहिल हो
पूरे चाँद की रात हो
और तुम आओ
कभी यूँ भी तो हो...

कभी यूँ भी तो हो
परियों की महफ़िल हो
कोई तुम्हारी बात हो
और तुम आओ
कभी यूँ भी तो हो...

कभी यूँ भी तो हो
ये नर्म, मुलायम, ठंडी हवाएँ
जब घर से तुम्हारे गुज़रें
तुम्हारी खुशबू चुराएँ
मेरे घर ले आयें
कभी यूँ भी तो हो...

कभी यूँ भी तो हो
सूनी हर महफ़िल हो
कोई न मेरे साथ हो
और तुम आओ
कभी यूँ भी तो हो...

कभी यूँ भी तो हो
ये बादल ऐसा टूट के बरसे
मेरे दिल की तरह मिलने को
तुम्हारा दिल भी तरसे
तुम निकलो घर से
कभी यूँ भी तो हो...

कभी यूँ भी तो हो
तन्हाई हो, दिल हो
बूँदें हों, बरसात हो
और तुम आओ
कभी यूँ भी तो हो...

कभी यूँ भी तो हो
दरिया का साहिल हो
पूरे चाँद की रात हो
और तुम आओ
कभी यूँ भी तो हो...

Movie/Album: सिलसिले (1998)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह

Saturday, 13 March 2021

जाते-जाते वो मुझे

जाते-जाते वो मुझे
अच्छी निशानी दे गया
उम्र भर दोहराऊँगा
ऐसी कहानी दे गया
जाते जाते वो मुझे...

उससे मैं कुछ पा सकूँ
ऐसी कहाँ उम्मीद थी
ग़म भी वो शायद बराए
महरबानी दे गया
उम्र भर दोहराऊँगा...

सब हवाएँ ले गया
मेरे समंदर की कोई
और मुझको एक कश्ती
बादबानी दे गया
उम्र भर दोहराऊँगा...

खैर मैं प्यासा रहा
पर उसने इतना तो किया
मेरी पलकों की कतारों को
वो पानी दे गया
उम्र भर दोहराऊँगा...

Movie/Album: सिलसिले (1998)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह

Friday, 12 March 2021

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी, के हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी...

निकलना खुल्द से आदम का सुनते आए हैं लेकिन
बहुत बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले
मुहब्बत में नहीं है फ़र्क जीने और मरने का
उसी को देखकर जीते हैं, जिस काफ़िर पे दम निकले
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी...

ख़ुदा के वास्ते पर्दा न काबे इसे उठा ज़ालिम
कहीं ऐसा ना हो याँ  भी वही काफ़िर सनम निकले
कहाँ मयखाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइज़
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था के हम निकले
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी...

Movie/Album: मिर्ज़ा ग़ालिब (टीवी)(1988)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: मिर्ज़ा ग़ालिब
Performed By: जगजीत सिंह

Thursday, 11 March 2021

दुनिया से दिल लगाकर

दुनिया से दिल लगाकर दुनिया से क्या मिलेगा
याद-ए-ख़ुदा किए जा, तुझको ख़ुदा मिलेगा

दौलत हो या हुकूमत, ताक़त हो या जवानी
हर चीज़ मिटने वाली, हर चीज़ आनी-जानी
ये सब गुरूर इक दिन मिट्टी में जा मिलेगा
याद-ए-ख़ुदा किए जा...

आता नहीं पलट कर गुज़रा हुआ ज़माना
क्या ख्वाब का भरोसा, क्या मौत का ठिकाना
ये ज़िंदगी गँवाकर क्या फ़ायदा मिलेगा
याद-ए-ख़ुदा किए जा...

तक़दीर जो दिखाए चुपचाप देखता चल
ईमान के सहारे, नेकी का रस्ता चल
इस रास्ते पे आकर हर रास्ता मिलेगा
दुनिया से दिल लगाकर...

Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: चराग हसन हसरत
Performed By: जगजीत सिंह

Wednesday, 10 March 2021

दर्द अपना लिख ना पाए

दर्द अपना लिख ना पाए, ऊँगलियाँ जलती रहीं
रस्मों के पहरे में, दिल की चिट्ठियाँ जलती रहीं
दर्द अपना लिख ना पाए...

ज़िन्दगी की महफिलें सजती रहीं हर पल मगर
मेरे कमरे में मेरी तन्हाइयाँ जलती रहीं
दर्द अपना लिख ना पाए...

बारिशों के दिन गुज़ारे, गर्मियाँ भी कट गयीं
पूछ मत हमसे कि कैसे सर्दियाँ जलती रहीं
दर्द अपना लिख ना पाए...

तुम तो बादल थे, हमें तुमसे बड़ी उम्मीद थी
उड़ गए बिन बरसे तुम भी, बस्तियाँ जलती रहीं
दर्द अपना लिख ना पाए...

Movie/Album: कहानी गुड़िया की (2008)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: मदन पाल
Performed By: जगजीत सिंह

Tuesday, 9 March 2021

प्यार मुझसे जो किया

प्यार मुझसे जो किया तुमने तो क्या पाओगी
मेरे हालात कीआंधी में बिखर जाओगी
प्यार मुझसे जो किया...

रंज और दर्द की बस्ती का मैं बाशिंदा हूँ
ये तो बस मैं हूँ के इस हाल में भी ज़िन्दा हूँ
ख्वाब क्यों देखूँ वो कल जिसपे मैं शर्मिंदा हूँ
मैं जो शर्मिंदा हुआ तुम भी तो शर्माओगी
प्यार मुझसे जो किया...

क्यों मेरे साथ कोई और परेशां रहे
मेरी दुनिया है जो वीरान तो वीरान रहे
ज़िन्दगी का ये सफ़र तुमपे तो आसान रहे
हमसफ़र मुझको बनाओगी तो पछताओगी
प्यार मुझसे जो किया...

एक मैं क्या अभी आएँगे दीवाने कितने
अभी गूंजेंगे मोहब्बत के तराने कितने
ज़िन्दगी तुमको सुनाएगी फ़साने कितने
क्यों समझती हो मुझे भूल नहीं पाओगी
प्यार मुझसे जो किया...

Movie/Album: साथ साथ (1982)
Music By: कुलदीप सिंह
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह

Monday, 8 March 2021

अहल-ए-दिल

अहल-ए-दिल यूँ भी निभा लेते हैं
दर्द सीने में छुपा लेते हैं

भूपिंदर सिंह
ज़ख्म जैसे भी मिले ज़ख्मों से
दिल के दामन को सजा लेते हैं
दर्द सीने में छुपा...

अपने क़दमों में मोहब्बत वाले
आसमानों को झुका लेते हैं
दर्द सीने में छुपा...

लता मंगेशकर
दिल की महफ़िल में उजालों के लिये
याद की शम्मा जला लेते हैं
दर्द सीने में छुपा...

जलते मौसम में भी ये दीवाने
कुछ हसीं फूल खिला लेते हैं
दर्द सीने में छुपा...

अपनी आँखों को बनाकर ये ज़ुबाँ
कितने अफ़साने सुना लेते हैं
दर्द सीने में छुपा...

जिनको जीना है मोहब्बत के लिये
अपनी हस्ती को मिटा लेते हैं
दर्द सीने में छुपा...

Movie/Album: दर्द (1981)
Music By: खय्याम
Lyrics By: नक्श ल्यालपुरी
Performed By: भूपिंदर सिंह, लता मंगेशकर

Sunday, 7 March 2021

ये सफ़र बहुत है कठिन

दिल नाउम्मीद तो नहीं
नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम
मगर शाम ही तो है

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
न उदास हो मेरे हमसफ़र
ये सफ़र बहुत है...

ये सितम की रात है ढलने को
है अँधेरा ग़म का पिघलने को
ज़रा देर इसमें लगे अगर
न उदास हो मेरे हमसफ़र
ये सफ़र बहुत है...

नहीं रहने वाली ये मुश्किलें
के हैं अगले मोड़ पे मंज़िलें
मेरी बात का तू यक़ीन कर
न उदास हो मेरे हमसफ़र
ये सफ़र बहुत है...

Movie/Album: 1942 अ लव स्टोरी (1994)
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: जावेद अख़्तर
Performed By: शिवाजी चट्टोपाध्याय


कभी ढूँढ लेगा ये कारवाँ
वो नयी ज़मीं नया आसमाँ
जिसे ढूँढती है तेरी नज़र
न उदास हो मेरे हमसफ़र
ये सफ़र बहुत है...

Saturday, 6 March 2021

ये बता दे मुझे ज़िन्दगी

ये बता दे मुझे ज़िन्दगी
प्यार की राह के हमसफ़र, किस तरह बन गये अजनबी
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी
फूल क्यों सारे मुरझा गये, किस लिये बुझ गयी चाँदनी
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी...

कल जो बाहों में थी और निगाहों में थी
अब वो गर्मी कहाँ खो गयी
ना वो अंदाज़ है, ना वो आवाज़ है
अब वो नर्मी कहाँ खो गयी
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी...

बेवफ़ा तुम नहीं, बेवफ़ा हम नहीं
फिर वो जज़बात क्यूँ सो गये
प्यार तुमको भी है, प्यार हमको भी है
फ़ासले फिर ये क्यों हो गये
ये बता दे मुझे ज़िन्दगी...

Movie/Album: साथ साथ (1982)
Music By: कुलदीप सिंह
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह, चित्रा सिंह

Friday, 5 March 2021

हर तरफ़ हर जगह

हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तन्हाइयोँ का शिकार आदमी

सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपनी ही लाश का ख़ुद मज़ार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का...

हर तरफ़ भागते-दौड़ते रास्ते
हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का...

रोज़ जीता हुआ, रोज़ मरता हुआ
हर नये दिन नया इंतज़ार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का...

ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र
आख़री साँस तक बेक़रार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का...

Movie/Album: सजदा (1991)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: निदा फ़ाज़ली
Performed By: जगजीत सिंह, लता मंगेशकर

Thursday, 4 March 2021

हर एक बात पे

कुन्दनलाल सहगल

हर एक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है
तुम्हीं बताओ ये अन्दाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है

रगों में दौड़ने-फिरने के हम नहीं क़ाइल
जब आँख ही से न टपका तो वो लहू क्या है

पियूँ शराब अगर ख़ुम भी देख लूँ दो-चार
ये शीशा-ओ-क़दह-ओ-कूज़ा-ओ-सुबू क्या है

हुआ है शाह का मुसाहिब, फिरे है इतराता
वगरना शहर में ग़ालिब की आबरू क्या है

जगजीत सिंह, विनोद सहगल, चित्रा सिंह

हर एक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है
तुम्हीं कहो ये अन्दाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है

रगों में दौड़ते-फिरने के हम नहीं क़ाइल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन
हमारी जेब को अब हाजत-ऐ-रफू क्या है

जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है

रही न ताक़त ऐ गुफ्तार और अगर हो भी
तो किस उम्मीद पे कहिये के आरज़ू क्या है

Movie/Album: ग़ैर फ़िल्मी ग़ज़ल, मिर्ज़ा ग़ालिब (टी वी सीरियल) (1988)
Music By: "अज्ञात", जगजीत सिंह
Lyrics By: मिर्ज़ा ग़ालिब
Performed By: कुन्दनलाल सहगल, जगजीत सिंह, विनोद सहगल, चित्रा सिंह

Wednesday, 3 March 2021

नुक़्ता-चीं है ग़म-ए-दिल

कुन्दनलाल सहगल
नुक़्ता-चीं है ग़म-ए-दिल, उसको सुनाये न बने
क्या बने बात जहाँ, बात बनाये न बने
क्या बने बात...

मैं बुलाता तो हूँ उसको, मगर ऐ जज़्बा-ए-दिल
उस पे बन जाये कुछ ऐसी कि बिन आये न बने
नुक़्ता-चीं है...

बोझ वो सर से गिरा, है कि उठाये न उठे
काम वो आन पड़ा है कि बनाये न बने
नुक़्ता-चीं है...

इश्क़ पर ज़ोर नहीं, है ये वो आतिश 'ग़ालिब'
कि लगाये न लगे और बुझाये न बने
नुक़्ता-चीं है...

सुरैया

नुक्ता-चीं है ग़म-ए-दिल, उसको सुनाये न बने
क्या बने बात जहाँ, बात बनाये न बने
नुक्ता-चीं है...

ग़ैर फिरता है लिये यूँ तेरे ख़त को के अगर
कोई पूछे के ये क्या है तो छुपाये न बने
नुक्ता-चीं है...

मैं बुलाता तो हूँ उसको मगर ऐ जज़्बा-ए-दिल
उसपे बन जाये कुछ ऐसी कि बिन आये न बने
नुक्ता-चीं है...

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब
कि लगाये न लगे और बुझाये न बने
नुक्ता-चीं है...

मोहम्मद रफ़ी
नुक़्ता-चीं है ग़म-ए-दिल उसको सुनाये न बने
क्या बने बात जहाँ बात बनाये न बने

खेल समझा है, कहीं छोड़ न दे, भूल न जाए
काश, यूँ भी हो के बिन मेरे सताये न बने

बोझ वो सर से गिरा है कि उठाये न उठे
काम वो आन पड़ा है कि बनाये न बने

इश्क़ पर ज़ोर नहीं, है ये वो आतिश 'ग़ालिब'
कि लगाये न लगे और बुझाये न बने
नुक़्ता-चीं है...

Movie/Album: ग़ैर-फ़िल्मी ग़ज़ल, मिर्ज़ा ग़ालिब (1954)
Music By: अज्ञात, ग़ुलाम मोहम्मद, खय्याम
Lyrics By: मिर्ज़ा ग़ालिब
Performed By: कुन्दनलाल सहगल, सुरैया, मोहम्मद रफ़ी

Tuesday, 2 March 2021

इश्क़ मुझको नहीं

तलत महमूद
इश्क़ मुझको नहीं वहशत ही सही
मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही

क़ता कीजे ना तअल्लुक़ हमसे
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही

मेरे होने में है क्या रुसवाई
ऐ वो मजलिस नहीं ख़ल्वत ही सही

हम भी दुशमन तो नहीं हैं अपने
ग़ैर को तुझसे मोहब्बत ही सही

हम कोई तर्क़-ए-वफ़ा करते हैं
ना सही इश्क़ मुसीबत ही सही

हम भी तस्लीम की ख़ू डालेंगे
बे-नियाज़ी तेरी आदत ही सही

यार से छेड़ चली जाये असद
गर नहीं वस्ल तो हसरत ही सही

चित्रा सिंह
इश्क़ मुझको नहीं वहशत ही सही
मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही
इश्क़ मुझको नहीं...

हम भी दुश्मन तो नहीं हैं अपने
ग़ैर को तुझसे मुहब्बत ही सही

हम कोई तर्क़-ए-वफ़ा करते हैं
ना सही इश्क़ मुसीबत ही सही
इश्क़ मुझको नहीं...

Movie/Album: मिर्ज़ा ग़ालिब (1954), मिर्ज़ा ग़ालिब (टी वी सीरियल) (1988)
Music By: ग़ुलाम मोहम्मद, जगजीत सिंह
Lyrics By: मिर्ज़ा ग़ालिब
Performed By: तलत महमूद, चित्रा सिंह

Monday, 1 March 2021

ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा

ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा
ज़िन्दगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफिला साथ और सफ़र तन्हा
ज़िन्दगी यूँ हुई बसर...

अपने साये से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा

रात भर बोलते हैं सन्नाटे
रात काटे कोई किधर तन्हा

दिन गुज़रता नहीं है लोगों में
रात होती नहीं बसर तन्हा

हमने दरवाज़े तक तो देखा था
फिर न जाने गए किधर तन्हा
क़ाफिला साथ और...

Movie/Album: मरासिम (2000)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: जगजीत सिंह