Friday, 18 December 2020

बरसो रे

बरसो रे मेघा-मेघा
बरसो रे, मेघा बरसो
मीठा है कोसा है, बारिश का बोसा है
जल-थल-चल-चल
चल-चल बहता चल

गीली-गीली माटी, गीली माटी के
चल घरौंदे बनायेंगे रे
हरी भरी अम्बी, अम्बी की डाली
मिल के झूले झुलाएंगे रे
धन बैजू गजनी, हल जोते सबने
बैलों की घंटी बजी, और ताल लगे भरने
रे तैर के चली, मैं तो पार चली
पार वाले पर ले किनारे चली
रे मेघा...
नन्ना रे..

काली-काली रातें, काली रातों में
ये बदरवा बरस जायेगा
गली-गली मुझको, मेघा ढूँढेगा
और गरज के पलट जायेगा
घर आँगन अंगना, और पानी का झरना
भूल न जाना मुझे, सब पूछेंगे वरना
रे बह के चली, मैं तो बह के चली
रे कहती चली, मैं तो कहके चली
रे मेघा...
नन्ना रे...

Movie/Album: गुरु (2007)
Music By: ए.आर.रहमान
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: श्रेया घोषाल

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