Sunday, 6 December 2020

साँस

साँस में तेरी साँस मिली तो
मुझे साँस आई
रूह ने छू ली जिस्म की खुश्बू
तू जो पास आई

कब तक होश संभाले कोई
होश उड़े तो उड़ जाने दो
दिल कब सीधी राह चला है
राह मुड़े तो मुड़ जाने दो
तेरे ख़याल में डूबके अक्सर
अच्छी लगी तन्हाई
साँस में तेरी...

रात तेरी बाँहों में कटे तो
सुबह बड़ी हलकी लगती है
आँख में रहने लगे हो क्या तुम
क्यूँ छलकी-छलकी लगती है
मुझको फिर से छू के बोलो
मेरी कसम क्या खाई
साँस में तेरी...

Movie/Album: जब तक है जान (2012)
Music By: ए.आर.रहमान
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: श्रेया घोषाल, मोहित चौहान

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