कैसे मुझे तुम मिल गयी
किस्मत पे आये ना यकीं
उतर आई झील में
जैसे चाँद उतरता है कभी
हौले हौले, धीरे से
गुनगुनी धूप की तरह से
तरन्नुम में तुम
छू के मुझे गुज़री हो यूँ
देखूँ तुम्हें या मैं सुनूँ
तुम हो सुकूँ, तुम हो जुनूँ
क्यों पहले ना आई तुम
कैसे मुझे तुम मिल गयी
किस्मत पे आये ना यकीं
मैं तो ये सोचता था, के आजकल
उपरवाले को फ़ुर्सत नहीं
फिर भी तुम्हें बना के वो
मेरी नज़र में चढ़ गया
रुतबे में वो और बढ़ गया
बदले रास्ते झरने और नदी
बदले दीप की टिमटिम
छेड़े ज़िंदगी धुन कोई नयी
बदली बरखा की रिमझिम
बदलेंगी ऋतुयें अदा, पर मैं रहूँगी सदा
उसी तरह तेरी बाहों में बाहें डाल के
हर लम्हा, हर पल
ज़िन्दगी सितार हो गई
रिमझिम मल्हार हो गई
मुझे आता नहीं किस्मत पे अपनी यकीं
कैसे मुझको मिल गयी तुम..
Movie/Album: गजनी (2008)
Music By: ए.आर.रहमान
Lyrics By: प्रसून जोशी
Performed By: बेनी दयाल, श्रेया घोषाल
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