Monday, 7 September 2020

रहते थे कभी जिनके दिल में

रहते थे कभी जिनके दिल में हम
जान से भी प्यारों की तरह
बैठे हैं उन्हीं के कूचे में हम
आज गुनहगारों की तरह
रहते थे कभी जिनके...

दावा था जिन्हें हमदर्दी का
ख़ुद आ के न पूछा हाल कभी
महफ़िल में बुलाया है हम पे
हँसने को सितमगारों की तरह
रहते थे कभी जिनके...

बरसों के सुलगते तन मन पर
अश्कों के तो छींटे दे ना सके
तपते हुए दिल के ज़ख़्मों पर
बरसे भी तो अंगारों की तरह
रहते थे कभी जिनके...

सौ रुप भरे जीने के लिए
बैठे हैं हज़ारों ज़हर पिये
ठोकर न लगाना हम ख़ुद हैं
गिरती हुई दीवारों की तरह
रहते थे कभी जिनके...

Movie/Album: ममता (1966)
Music By: रोशन
Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
Performed By: लता मंगेशकर

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