Monday, 31 August 2020

हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी

हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तन्हाइयोँ का शिकार आदमी

सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपनी ही लाश का ख़ुद मज़ार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का...

हर तरफ़ भागते-दौड़ते रास्ते
हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का...

रोज़ जीता हुआ, रोज़ मरता हुआ
हर नये दिन नया इंतज़ार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का...

ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र
आख़री साँस तक बेक़रार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का...

Movie/Album: सजदा (1991)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: निदा फ़ाज़ली
Performed By: जगजीत सिंह, लता मंगेशकर

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