Saturday, 3 April 2021

रात आँखों में ढली

रात आँखों में ढली, पलकों पे जुगनू आए
हम हवाओं की तरह जा के उसे छू आएरात आँखों में ढली...

बस गई है मेरे एहसास में ये कैसी महक
कोई खुशबू मैं लगाऊँ तेरी खुशबू आए
हम हवाओं की तरह जा के उसे छू आए
रात आँखों में ढली...

उसने छू कर मुझे पत्थर से फिर इन्सान कियामुद्दतों बाद मेरी आँख में आँसूँ आए
रात आँखों में ढली...

मैंने दिन रात खुदा से ये दुआ माँगी थीकोई आहट ना हो दर पर मेरे जब तू आई
हम हवाओं की तरह जा के उसे छू आए
रात आँखों में ढली...

Movie/Album: तुम तो नहीं हो (2005)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: बशीर बद्र
Performed By: जगजीत सिंह

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