दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए
मौत का ज़हर है फ़िज़ाओं में
अब कहाँ जा के साँस ली जाए
दुश्मनों की...
बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआ
ये नदी कैसे पार की जाए
दुश्मनों की...
मेरे माज़ी के ज़ख़्म भरने लगे
आज फिर कोई भूल की जाए
दुश्मनों की...
बोतलें खोल के तो पी बरसों
आज दिल खोल कर भी पी जाए
दुश्मनों की...
Movie/Album: इन सर्च (1996)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: राहत इंदौरी
Performed By: जगजीत सिंह
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