Tuesday, 23 February 2021

वो ख़त के पुर्ज़े उड़ा रहा था

वो ख़त के पुर्ज़े उड़ा रहा था
हवाओं का रुख दिखा रहा था

कुछ और भी हो गया नुमायाँ
मैं अपना लिक्खा मिटा रहा था
हवाओं का रुख...

उसी का ईमाँ बदल गया है
कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था
हवाओं का रुख...

वो एक दिन एक अजनबी को
मेरी कहानी सुना रहा था
हवाओं का रुख...

वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था
हवाओं का रुख...

Movie/Album: मरासिम (2000)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: जगजीत सिंह

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