Sunday, 28 March 2021

मैं भूल जाऊँ तुम्हें

मैं भूल जाऊँ तुम्हें
अब यही मुनासिब है
मगर भुलाना भी चाहूँ
तो किस तरह भूलूँ
कि तुम तो फ़िर भी हकीकत हो
कोई ख्वाब नहीं

यहाँ तो दिल का ये आलम है क्या कहूँ, कमबख़्त
भुला सका ना ये वो सिलसिला, जो था भी नहीं
वो इक ख्याल जो आवाज़ तक गया ही नहीं
वो एक बात जो मैं कह नहीं सका तुमसे
वो एक रब्त जो हममें कभी रहा ही नहीं
मुझे है याद वो सब जो कभी हुआ ही नहीं
अगर ये हाल है दिल का तो कोई समझाए
तुम्हें भुलाना भी चाहूँ...

Movie/Album: सिलसिले (1998)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: जगजीत सिंह

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