Wednesday, 17 March 2021

शाम से आँख में

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आपकी कमी सी है
शाम से आँख में...

दफ़्न कर दो हमें के साँस मिले
नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है
आज फिर आपकी कमी सी है

वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
इसकी आदत भी आदमी सी है
आज फिर आपकी कमी सी है

कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी
एक तसलीम लाज़मी सी है
शाम से आँख में नमी...

Movie/Album: मरासिम (2000)
Music By: जगजीत सिंह
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: जगजीत सिंह

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